भूमिका

दृष्टियां।

इस पुस्तक में बौद्ध मार्ग के मूल तत्वों पर कुछ दृष्टियां प्रस्तुत की गई हैं। इनमें शामिल हैं वे मनोवृत्तियां, धारणाएं और साधनाएं जो मन को पूर्ण मुक्ति की ओर लेकर जा सकती हैं। यदि दृष्टियां सही हैं, तो वे भी मार्ग का अंग बन जाती हैं। इसलिए, इन निबंधों का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए यह समझना आवश्यक है कि मुक्ति पाने में दृष्टियों का क्या महत्व है।

मार्ग के बारे में कोई भी सही वचन “सम्यक दृष्टि” का भाग माना जा सकता है। लेकिन, मार्ग का लक्ष्य है पूर्ण मुक्ति, सभी दृष्टियों के लगाव से भी मुक्ति। अर्थात, सम्यक दृष्टि मार्ग के अंत में नहीं प्रमाणित की जाती। यानी कि, हम पथ का उपयोग केवल सम्यक दृष्टि तक पहुँचने के लिए नहीं कर रहे। मगर, सम्यक दृष्टि के बिना हम पथ का पालन कर ही नहीं सकते। इसलिए, एक महान लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सम्यक दृष्टि एक उपकरण है, रणनीति है, युक्ति है। सम्यक दृष्टि की विशेषता यह है कि अस्तित्व के प्रति यह नज़रिया अंत में अपने भी पार ले जाता है। यानी कि, सम्यक दृष्टि मन में ऐसी पूछताछ जगाती है जो मन को सम्यक दृष्टि के भी पार ले जाती है। सम्यक दृष्टि की प्रभावशीलता ही उसकी सच्चाई का प्रमाण है। उसकी कार्य-विधि की सच्चाई और परिणाम की श्रेष्ठता के कारण, यह रणनीति के तौर पर आर्य बन जाती है।

ये निबंध इस आर्य रणनीति में सहायक बनने के लिए लिखे गए हैं। इस रणनीति में और बहुत कुछ शामिल है जो किसी भी पुस्तक में लिखा नहीं जा सकता। आखिरकार, सम्यक दृष्टि मार्ग का केवल एक अंग है। लेकिन मेरी आशा है कि ये निबंध तुम्हें मुक्ति के सही मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद करेंगे, और वे जो मुद्दे उठाते हैं, वे रास्ते पर उपयोगी साबित होंगे।

ठानिस्सारो भिक्खु
(जेफ़्री डि-ग्राफ़)
अगस्त १९९९; दिसंबर २०१८